नई शुरुआत - सुबह की प्रेरणादायक कविता

नई शुरुआत 


वो चिड़िया का मीठा गुंजन 


सुबह की हवा का स्पंदन


बौराए पेड़ो का मस्ती में झुलना 


सुर का यु मचलना 


मेरे अलसाए मन को छेड़ गया 


कुछ कानो में कह गया 


उतार फेंक अतीत की चादर को 


ओढ़ ले नव प्रभात को 


ओस की ये नन्ही बुँदे 


कर देगी तन मन को तृप्त 


आशाओ के खुले आसमां में ,


उड़ चल तू क्षितिज तक ,


अभिलाषाओं का ये हरा  मैदान ,


कर गया यौवन का संचार ,


निराशा के कोहरे को चीर ,


जीतेगा मेरे मन का मीत ,


स्वप्न सलोने दिखा गया ,


मुझे वो यूं भरमा गया ,


पल्लिवत कर कुसुम की क्यारी ,


अंशुमान ने निद्रा त्यागी ,


मीठी सी ठंडक को लेकर ,


आत्मसात ,


चली करने नई शुरुआत 

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