आलोचना का महत्व

आलोचना-


सामन्यत: आलोचना को बुरा माना जाता है , लोग आलोचना से घबराते है ,डरते है | आलोचक को शत्रु या दुश्मन माना जाता है , उससे झगड़ने या अनिष्ट करने का प्रयास किया जाता है | पर लोगो की यह सोच सत्य से दूर है | इसके विपरीत आलोचक सही मायने में आपका प्रशंसक होता है | आलोचक के मन में परोक्ष रूप से आपके प्रति श्रध्दा होती है , सम्मान होता है |आपकी आलोचना करके वह अन्य लोगो का आपकी ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है | इसके सिवाय आलोचक आपको सफलता की धज्जियां उड़ाने वालो से , आपसे नफरत करने वालो से आपकी रक्षा करता है |

अत: आलोचक को अपनी आलोचना का कोई उत्तर देना , स्पष्टीकरण देना ,बचाव करने में अपनी ऊर्जा ,समय नष्ट करना व्यर्थ है | और सम्भव है की आप अपनी सफलता से भटक जाएं|

आलोचक आलोचना करके आलोच्य के चरित्र के बजाय अपने ही चरित्र की लोगो के सामने धज्जियां उड़ाता है ,क्योंकि कोई भी ज्ञानी ,समझदार ,विवेकशील व्यक्ति न तो किसी की आलोचना ही करता है और न ही वह किसी की आलोचना सुनना पसंद करता है | ऐसे व्यक्तियो के पास अपनी व्यस्तता के कारण दुसरो की अनगर्ल ,व्यर्थ की बाते सुनने का समय ही कहाँ होता है | यदि आपकी आलोचना किसी दैनिक समाचार पत्रिका या अलग से पेम्लेट आदि में प्रकाशित होती है तो पहले तो आपका नाम लोगो में चर्चित होगा ,लोग आपको जानेंगे और परोक्ष रूप से आप कीर्ति प्राप्त करेंगे | दूसरी बात सामान्यत दैनिक पाठक समाचार पत्र की मोटे अक्षरों की सुर्खिया पर एक सामान्य दृष्टि डालकर , पत्र को बासी मान लेते है |

Comments

Popular posts from this blog

LeadArk Review Hindi 2020- Earn Daily 3000 Rs From Home

What is tally

मन और बुद्धि के बीच क्या अंतर है?