भय क्या है? और इसे काबू कैसे करें

भय क्या है? What is Fear in hindi


कभी –कभी हम सबके मन में किसी न किसी कारण भय रहता है | भय हमेशा कमजोर मानसिकता में उपजता है और नकारात्मक दिशा में व्यक्ति के चिंतन को ले जाता है | भय कभी भी जीवन के सकारात्मक पक्ष को नहीं देखता है और नहीं देखने देता है | भय जीवन की उन अनजानी चीजो से बी होता है म जिनसे हमारा कभी सामना नहीं हुआ और भय उन कारणों से भी हो सकता है , जिनसे हम परिचित है |

चर्चिल के अनुसार – “भय अँधेरे के समान है और साहस रोशनी के समानं , साहस के आ जाने से भय खुद ब खुद समाप्त हो जाता है यदि हमारे पास साहस है तो हम निर्भय होकर अपनी सफलता की कहानी खुद लिख सकते है ”



एवरेस्ट पर चढने वाले नेत्रहीन एरिक वीहेनमेयर  से जब पूछा गया की क्या आपको भय नहीं लगता ? तो उनका जवाब था की कदम कदम पर मैंने अपने भय पर जीत हासिल की है और आखिरी कदम पर भी भय से मेरा सामना हुआ , जिसने मुझे एवरेस्ट तक पहुँचाया |

भय हमारे जीवन में तरक्की की और बढने वाले हर कदम को रोकने के लिए आता है | भय के कारण मन में कई तरह के बुरे विचार उठते है , शंकाएँ जन्म लेती है और हम बढ़ते हुए कदमो को पीछे की ओर खीच लेते है , क्योंकि मन में यह भय आ जाता है की कही हमसे  कुछ गलत न हो जाए ? हम जो कर रहे है उसका परिणाम क्या होगा ? और इसी तरह न जाने कितने  सवाल हमारे जेहन में आते है और हमारे मन को बोझिल कर देते है | भय के कारण व्यक्ति का शरीर और मन ,दोनों ही कमजोर हो जाते है हमारे सोचने समझने की क्षमता भी कुंद पड़ जाती है |

भय से मुक्त होने का एक आसन तरीका यह हो सकता है की जब हमे डर लगे तो हम गहरी साँस ले कल्पना करे की अंदर बैठा हुआ डर साँस छोड़ते समय बाहर निकल रहा है और इसके बाद साँस लेते वक्त यह विचार करे की हमारे अंदर साहस , हिम्मत , उत्साह का जागरण हो रहा है | हमारे  अंदर इतनी ऊर्जा इक्कठी हो गई की इसके माध्यम से कुछ भी किया जा सकता है और बिना भय के अपने कार्य में लग जाना चाहिए |  ऐसा नहीं है ऐसा करने से भय हमारे जीवन से पूरी तरह चला जाएगा वह तो फिर से आयगा ,लेकिन यदि हमारे अंदर भय का सामना करने का साहस है तो वह फिर हमारे सामने ज्यादा समय तक नही टिक सकता |

भय को पराजित किया जा सकता है केवल निडर होकर | जो किसी भी परीस्थिति से डरता नहीं , बड़े से बड़े संकट का सामना बहादुरी के साथ करता है . भय उसके सामने आने से भी घबराता है , लेकिन जो कायर होते है , मन में कई तरह की कुशंकाएँ करते है उनके सामने भय विकराल रूप धारण करता है | ऐसे लोग हमेशा दुखी व् बेजान रहते है |

डर हमारे हाथ पेरो में पड़ी हुई लोहे की वे बेड़िया है , जो हमे अपनी नकारात्मक दुनिया में गुलाम बनाती है और ह्मे कुछ करने नहीं देती , हमे कुछ भी सीखने नहीं देती और इसके साथ ही जीवन में कभी कामयाब भी नहीं होने देती | भय के कारण ही हम दीन –दुर्बल व् दुखी रहते है और इसके कारण ही हम जीवन में कुछ भी करने से घबराते है लेकिन यह डर ही है ,जो हमारे व्यक्तित्व के विकास में सबसे बड़ी रूकावट है | लेकिन इसे दूर किया जा सकता है – अपने अंदर की क्षमताओ को पहचान कर |

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