ऐसा वक्त कहाँ से लाऊँ

ऐसा वक्त कहाँ से लाऊँ  - Hindi-Urdu Poetry


वेफिकरी की अलसाई सी उजली सुबहें काली रातें


हकलाने की तुतलाई सी आधी और अधूरी बातें


आंगन में फिर लेट रात को चमकीले से तारे गिनना


सुबह हुए फिर सबसे पहले पिचगोटी का कंकड़ चुनना


मन करता है फिर से मैं एक छोटा बच्चा बन जाऊं


जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं.



बारिश के बहते पानी में छोटी कागज नाव चलाना


आंगन में बिखरे दानों को चुंगती चिड़िया खूब उड़ाना


बाबा के कंधों पर बैठके दूर गाँव के मेला जाना


मेले में जिद करके उनसे गर्मागर्म जलेबी खाना


मन करता है फिर से मैं नन्हों संग नन्हा बन जाऊं


जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं.



मिट्टी के और बालू बाले छोटे प्यारे घरों का बनना


खेतों से चोरी से लाये चूसे मीठे मीठे गन्ना


माँ ना देखे दावे पाँव से हो जाए उन छतों का चढना


पकड़े जाएँ तो फिर माँ से झूठीमूठी बातें गढ़ना


मन करता है फिर से में झूठों संग झूठा बन जाऊं


जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं.



झूठमूठ का झगड़ा करके बात बात पर खूब सा रोना


मान गए तो पल में खुश हों न माने तो चुप न होना


घरवालों से रूठ रूठ कर अपनी सब बातें मनवाना


पढने का नम्बर आया तो लगा दे फिर कोई बहाना


मन करता है फिर से मैं रूठों संग गुस्सा हो जाऊं


जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं.



रात हुए जल्दी से सोना सुबह हुए फिर देर से उठाना


खेलों से मन खुश होता है पढने से हो जाए थकना


माँ मुझको गोदी में ले लो बन जाऊं मैं तेरा ललना


पहले ला दो मेरा पलना फिर तुम मेरा पंखा झलना


मन करता है फिर से मैं एकबार फिर जन्मा जाऊं


जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं.

Comments

Popular posts from this blog

LeadArk Review Hindi 2020- Earn Daily 3000 Rs From Home

What is tally

मन और बुद्धि के बीच क्या अंतर है?