पेड़ का साथ- हिंदी कविता

जीवन का अन्त होगा जब,
छोटी बड़ी श्रंखलाएँ टूटेगीं सब,
न कोई नाता न रिश्ता,
कलम कागज भी साथ नही जाएँगे जब,
तब साथ जाएगा वह,
जिसने देखे कई पतझड़ अपने जीवन में,
तूफान भी हार मान गऐ जिसकी द्रढता हिलाने में,
अग्नि में भी प्रवेश तुमसे पहले जब वह कर जाएगा,
परित्याग का सर्वोत्तम उदाहरण तब जग पाएगा,
अपनी छाया और फलों से स्नेह दिया तुमको असीम,
तुम्हारे साथ साथ उसके बच्चे भी होंगे यतीम,
चिड़ियाँ गिलहरियाँ सबका घर छूटेगा,
दुख उनका भी तो होगा असीम..
याद करेंगी मिलकर बीते दिनों को,
हिम्मत भी तो जोड़नी होगी नया घर ढूंढ़ने को..
जीवन की कई अभिलाषाओं में
आज जोड़ती हूँ यह अभिलाषा,
कि जब मेरी वेदना का साथ मुझसे छूटे,
तब दाह मेरा बिजली से हो जाए..
ताकि मेरे बाद एक पेड़ का साथ अपने बच्चों से न छूट जाए...

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