श्री सत्य साईं बाबा के भगवान होने का सच

युगों से ये घटित होता आया है कि जब-जब वो सर्वशक्तिमान सत्ता इस धरा पर अवतरित हुआ है हम मानवों को अपने मूल स्वरूप से अवगत करवाने के लिए, हम अपनी सीमित ज्ञान से उस असीमित प्रेम और दया के सागर को पहचानने में असफल रहें हैं| अतः हमारी सीमित ज्ञान के अनुसार हीं तुक्ष्य चमत्कारों के माध्यम से उस सर्वशक्तिमान सत्ता को अपना परिचय देने के लिए विवश होना पड़ा है|

कलयुग के अवतार श्री सत्य साईं बाबा के जहाँ विश्व भर में उन्हें भगवान मानने वाले करोड़ों अनुयायी हैं वहीं करोड़ों आलोचक भी हैं, जो उनके चमत्कारों की आलोचना करने में पीछे नहीं रहते| इस संदेह का निवारण करने के लिए श्री सत्य साईं बाबा ने अपना परिचय स्वयं देते हुए स्पष्ट रूप से कहा है यद्पि मेरे द्वारा किए गए  चमत्कार मेरे सर्वशक्तिमान सत्ता के समक्ष अति तुक्ष्य हैं फिर भी समस्त प्राणियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मैं चमत्कार करता हूँ ताकि वे अपने स्वरूप से अवगत हो सकें | बाबा ने कहा कि मेरी शक्तियाँ असीम, अनंत और अकल्पनीय है| उन्होंने बताया कि अब तक के अवतारों में सबसे स्पष्ट भविष्यवाणी कृष्ण के अवतार होने की हुई है, उन्हें भी कई अवसरों पर हार का सामना करना पड़ा और यह भी प्रमाणित हुआ कि हार और जीत उनके द्वारा रचे गए नाटक के अंश थे |

श्री सत्य साईं बाबा ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब इस अवतार में हार-जीत जैसे नाटक के लिए कोई जगह नहीं है| मैं जैसा चाहूँगा वैसा हीं घटित होगा,जो योजना बनाऊँगा उसका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन होगा | मैं सनातन सत्यस्वरूप हूँ और सत्य को प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं होती है |

मेरे संकल्प मात्र से कार्यों का क्रियान्वयन होता है| मेरी कृपा सदा उन पर बनी रहती है जो मुझ में प्रेम और विश्वास रखते हैं| चूँकि मैं साधारण रूप से भक्तों के बीच घूमता, भजन गाता और बातें करता हूँ इस कारण से बुद्धिजीवी भी मेरे शक्ति, कृपा और अवतार होने की सत्यता को समझ पाने में असमर्थ हैं|मैं भौतिक बंधनों से परे हूँ तथा किसी भी जटिल रहस्य को सुलझाने में समर्थ हूँ|केवल वो लोग हीं मेरी सत्यता की झलक से अवगत हैं जिन्होंने मेरे प्रेम का साक्षात्कार किया है |

बाबा ने कहा कि क्यों मैं अँगृठी, तावीज़, माला आदि देता हूँ, ये मेरे और भक्तों के बीच अटूट बंधन का प्रतीक है, जब भी उन पर विपत्ति आती है मेरे द्वारा दी हुई भेंट पलक झपकने के अंतराल में मेरे पास आकर मेरी कृपा और सुरक्षा कवच से आवृत हो उनके पास पहुँच जााती है| मुझे भौतिक ईन्द्रियों से पहचानना असम्भव है| ऐसा नहीं है कि मेरी कृपा मात्र उन पर है जिन्हें मैंने भेंट दिया है या उन पर है जो मेरा नाम जपते हैं, मेरी कृपा सभी प्राणियों पर समान रूप से है| लेकिन मेरे प्रेम का साक्षात्कार उन्हें होता है जो सभी प्राणियों से प्रेम करते हैं |

श्री सत्य साईं बाबा ने कहा कि मेरे द्वारा अपनी सत्यता प्रकट करने का कारण मात्र यही है कि तुम सब हमारे उपदेशों का पालन कर मानव तन प्राप्त करने के लक्ष्य से अवगत हो और अपने मूल स्वरूप को पहचानो तथा अपने आत्मा में विराजमान साईं के प्रेम स्वरूप का साक्षात्कार करो |

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  1. […] श्री सत्य साईं बाबा द्वारा भक्तों के दुविधा का निवारण- […]

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