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Showing posts from December, 2017

आपके रिश्ते को बिगाड़ सकती है यह छोटी –छोटी आदते

आपके रिश्ते को बिगाड़ सकती है यह छोटी –छोटी आदते – आज के इस डिजिटल दुनिया में मजबूत रिश्ते बनाना बहुत ही मुशिकल हो गया है उससे भी ज्यादा मुश्किल इस रिश्तो को निभाना और इन्हें संजोकर रखना | कभी –कभी आपकी  छोटी –छोटी आदतों की वजह से रिश्तो में दरार आ जाती है हो सकता है की ये आदते आपको ख़राब न लगे मगर इन आदतों की वजह से आपका रिश्ता कमजोर हो सकता है |   आइये जानते है की , आपकी किन आदतों की सजा आपके रिश्ते को भुगतनी पड़ सकती है | समय ना निकालना -  हर रिश्ता अपने लिए समय मांगता है | काम और निजी जीवन के लिए समय निकालना आसन है मगर आपके रिश्ते को भी ऐसा समय चाहिए , जिसमे आप साथ मिलकर अच्छी यादे बना सके | अगर आप अपने साथी के लिए और अपने रिश्ते के लिए समय नही निकालते है तो इसका असर आपके रिश्ते पर पड़ सकता है | बिना सोचे –समझे पैसे खर्च करना – पैसे की वजह से भी कई बार रिश्तो में दरार आ जाती है | अगर आप अपने बजट और पैसे को सही तरह से मैनेज नही कर पाते है तो इसका असर आपके रिश्ते पर पड़ सकता है | और पैसे की कमी को लेकर अक्सर पति-पत्नी के बीच झगड़े हो सकते है | कालिंग की बजाय टेक्स्ट करना – अगर आप अपने स

शिक्षा समस्या क्यों ?

शिक्षा के दो स्र्तोत है – शब्द और जीवन व्यवहार | कुछ बाते शब्दों के माध्यम से सिखाई जाती है | उसे आदमी ग्रहण भी करता है ,शब्द के माध्यम से | यह अच्छा है ,करो ,यह काम बुरा है ,मत करो – यह शिक्षा का शाब्दिक माध्यम है | आज से ५०० वर्ष पूर्व गाँव –गाँव में स्कूल नही थे , गुरुकुल थे | किन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि उस वक्त लोग कम पढ़े लिखे थे | शब्दों के माध्यम से और अपने अनुभवो से उन्होंने शिक्षा का बहुत विकास किया | एक किसान या कारीगर का लड़का अपने काम में इतना कुशुल हो जाता था की आज आई ,टी.आई . और इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति उतना कुशल नही हो सकता | अनेक कहानिया और किस्से इस बात के साक्षी है की उन्होंने कितने आश्चर्यकारी काम किये थे | वह शिक्षा आनुवांशिकता के साथ ,उन्हें माँ की घुट्टी के साथ प्राप्त होती थी | हमारी उस परंपरा को आज भुलाया जा रहा है , जो गाँव के लोगो को सहज रूप से प्राप्त होती थी | आज न तो पिता के पास समय है की वह बेटे को सिखाए , न माँ को फुर्सत है की वह बेटी को शिक्षा दे | बड़े घर की बेटी , जो करोडपति और अरबपति के घर में जा रही है , वह चूल्हा –चौका सम्भालने के का

जीवन का संबंध - हिंदी कविता

जीवन का संबंध जन्म से मृत्यु तक का सफर जीवन ही है जीवन में सबसे बड़ा मित्र आत्मविश्वास ही है जीवन का सबसे बड़ा शस्त्र समाधान ही है जीवन का सबसे अधिक सम्मान विशवास करना है जीवन का सबसे बड़ा उपकार दुसरो की निस्वार्थ सेवा है जीवन का सबसे बड़ा पुरुस्कार अपराधो को क्षमा करना है जीवन का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध , ज्वलनता है जीवन की पहचान विधार्जन करना है जीवन का सबसे बड़ा दण्ड माता –पिता गुरु का अपमान है जीवन का सबसे बड़ा आहार सात्विक संतुलित आहार है जीवन का सबसे बड़ा भाव आत्मीयता का भाव है जीवन की सबसे बड़ी पूजा माता—पिता , गुरु की सेवा है

सफलता के सूत्र

सफलता के सूत्र-  Safalta Ke Sutra in Hindi ‘ मन के हारे हार ,मन के जीते जीत ‘ – इस सरल सी उक्ति का अर्थ जानते हुए भी , हम उससे कोई लाभ नहीं उठा पाते | क्यों ? इसके एक नहीं अनेक कारण है | लेकिन उन कारणों में रक महान अह्म है , और वह है की हम अपने आप को ,अपनी क्षमताओं को हमेशा कम आंकते है | हर व्यक्ति अपने आप में अभूतपूर्व संभावनाएं , क्षमताएं समेटे रखता है लेकिन उसकी हालत कस्तुरी मृग की भांति होती है ,जो यह न जानकर की कस्तुरी स्वयं उसके भीतर है ,उसकी सुवास ( सुगंध ) की खोज में यहाँ –वहाँ भटकता रहता है | यह एक वैज्ञानिक तथ्य है की जो को सौ डिग्री तक गर्म करने पर ही उससे भाप बनती है | यदि जल ९९ डिग्री तक ही गर्म होगा तो उससे भाप नहीं बनेगी , इंजीन गाड़ी नहीं खींच पाएगा | वह अपनी जगह से हिल भी नही सकेगा | कई लोग अपने जीवन की गाड़ी को कम गर्म जल से चलाने का यत्न करते है और असफल रहते है यह गर्म जल क्या है ? यह है – उत्साह , आपके मन में छिपा उत्साह मंद है .अपूर्ण है ओज से ,ऊर्जा से हीन है तो आप हर काम आधे –अधूरे मन से करते है | आधे –अधूरे मन से किया गया कोई भी काम कभी पूरा नहीं होता है , न कोई

मंत्र साधना से जुडी ख़ास बातें

मन्त्र साधना  -  मन्त्र के तीन तत्व होते है – शब्द ,संकल्प और साधना | मन्त्र का पहला तत्व शब्द  - शब्द मन के भावो को वहन करता है | मन के भाव शब्द के वाहन पर चढकर यात्रा करते है | कोई विचार सम्प्रेषण का प्रयोग करके , कोई औटोसजेशन का प्रयोग करके , उसे सबसे पहले ध्वनि का , शब्द का सहारा लेना पड़ता है | वह व्यक्ति अपने मन के भावो को तेज ध्वनि में उच्चारित करता है ,जोर जोर से बोलता है ,ध्वनि की तरंगे करता है ,मंद कर देता है पहले ओठ ,दांत ,कंठ सब अधिक सक्रिय थे , वे मंद हो जाते है | ध्वनि मंद हो जाती है | होंठो तक आवाज पहुँचती है पर बाहर नहीं निकलती | जोर से बोलना या मंद स्वर में बोलना – दोनों कंठ के प्रयत्न है | ये स्वर तंत्र के प्रयत्न है जहाँ कंठ का प्रयत्न होता है वह शक्तिशाली तो होता है किन्तु बहुत शक्तिशाली नही होता है | उसका परिणाम आता है किन्तु उतना परिणाम नहीं जितना हम मन्त्र से उम्मीद करते है | मन्त्र को वास्तविक परिणति या मूर्धन्य परिणाम तब आता है जब कंठ की क्रिया समाप्त हो जाती है और मन्त्र हमारे दर्शन केंद्र में पहुँच जाता है | यह मानसिक क्रिया है | जब मन्त्र की मानसिक क्रिया ह

एक पल भी जिन्दगी का व्यर्थ क्यों जाये? हिंदी कविता

एक पल भी जिन्दगी का व्यर्थ क्यों जाये? सुन सको तो फिर सुनो संवेदना मेरी , कब तक तजोगे राह तुम अन्याय की ? आदमी हो ,आदमी का अर्थ तो जानो , जिन्दगी का लक्ष्य क्या स्वयंमेव पहचानो जब सुगंधित जो करे उसको सुमन कहते है जलपान तक सीमा रही चौपाय की | कब तक तजोगे राह तुम अन्याय की ? आग –सी जो धुल ऊपर पैर चलता है , बुद्धि से अवरोध दलकर जो सँवरता है , वह सहज ही खोजता है मार्ग जीवन का जिसको रही सुधि स्वत्व की अभिप्राय की | कब तक तजोगे राह तुम अन्याय की ? जो किसी से दान में उत्थान पाता है , व्यक्ति वो हाँ में उसी की हाँ मिलाता है , बुदबुदाये यों लगे ज्यों खोलने से भी खुलती न खिड़की ज्ञान की संकाय की | कब तक तजोगे राह तुम अन्याय की ? एक पल भी जिन्दगी का व्यर्थ क्यों जाये ? जो किए सत्कर्म वे ही मंजिल पाये , विश्व उनको याद करता है सदा जग में जो अनय –भय के दमन को सामने आये | किसको पता है क्या अवधि है साय की ? कब तक तजोगे राह तुम अन्याय की ?  

डार्क सर्कल दूर करने के 4 घरेलू उपाय

      छुटकारा पाएं आँखों के डार्क सर्कल्स से - Best Home Remedies for Dark Circles In Hindi आपकी आँखे आपके व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ बता देती है कहा जाता है की आँखे आपका आइना होता है | अगर आप अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाना चाहते है तो आपको अपनी आँखों को आकर्षक बनाना होगा | हालाँकि अगर आप लैपटॉप ,मोबाइल आदि का इस्तेमाल ज्यादा करते है तो आपके आँखों के आस पास सुजन और डार्क सर्कल्स आ जाते है | इस कारण आपकी आँखे थकी –थकी लगती है और आपका व्यक्तित्व प्रभावशाली नहीं लगता | कुछ चीजो के प्रयोग से आप आँखों के आस पास डार्क सर्कल्स व् सुजन को हटा सकते है | दूध –  ठंडे दूध मर कॉटन पैड्स भिगोए और उन्हें आँखों पर करीब आधा घंटे के लिए रखे | इससे आँखों के आस पास की सूजन को कम करने में मदद मिलगी | आप गुलाब जल के साथ भी ऐसा कर सकते है | आलू – उबले हुए आलू के दो टुकड़े करे और आँखों के आस पास प्रभावित जगहों पर उनसे आराम से मालिश करे | ऐसा करने से आपके आँखों के आस पास डार्क सर्कल्स और सूजन कम हो जायेगी | ग्रीन टी बैग्स -  ग्रीन टी बैग्स को पानी में करीब दो मिनट तक भिगोए | इसके बाद उन्हें आधा घं

नारी की भूमिका-

नारी की भूमिका- हम सभी को प्रकृति ने बनाया है | प्रकृति ही हमको चलाती भी है अत: प्रकृति के स्वरूप की जानकारी एव उसके साथ तारतम्य का होना सुखी जीवन की पहली आवश्यकता है | प्रकृति में दो तत्व होते है – पदार्थ और ऊर्जा | पदार्थ को हम ब्रह्रा  कहते है | ऊर्जा को माया के नाम से जानते है ब्रह्रा में स्थायी भाव है | माया गतिमान तत्व है | माया को ही ब्रह्रा  की शक्ति कहा जाता है | कार्य लक्ष्मी करती है , नाम विष्णु का | सृष्टी विस्तार सरस्वती करती है ,नाम ब्रह्रा का | शक्ति ही नर भाव की पूर्णता है | पुरुष तो दोनों है | स्त्री भी पुरुष है |   मानव रूप में तो नर और नारी दोनों में ही गुण रहते है | नर में स्त्री भाव , नारी में नर भाव भी होता है | यही हमारी अर्धनारीश्वर की अवधारणा है | हमारे जीने के दो धरातल होते है | एक तो प्राकृतिक धरातल और दूसरा सांसारिक धरातल | प्राकृतिक धरातल से आत्मा का जुडाव रहता है | यह मरता भी नहीं है और जन्म भी नहीं लेता सांसारिक धरातल शरीर ,मन और बुद्धि से जुड़ा रहता है | ये माता –पिता से प्राप्त होते है | शरीर का नर और नारी रूप का भेद रहता है ,सृष्टी विकास के कारण | मन .

हँसना - यह एक ईश्वरीय वरदान है

क्यों ज़रूरी है हँसना? Importance of Laughing in Hindi सृष्टी के आरम्भ से ही हास्य सुखी जीवन का अनिवार्य अंग माना गया है मन के बोझ को कम करने , थकान को दूर करने का एक सहज साधन है , यह एक ईश्वरीय वरदान है | आज का युग तनाव का युग है बच्चे ,युवक,युवतियां ,बूढ़े सभी तनाव ग्रस्त है | बचपन से ही तनाव हो रहा है जब दो वर्ष के बच्चे को ही माँ –बाप स्कूल भेजने लगे है तो क्या होगा ? बच्चो का खेलना कूदना बंद हो रहा है | बडो से मिलजुल कर चलने की जगह एकल रहने की प्रवृति बढ़ रही है एक दुसरे को रोंदते हुए आगे बढने की इच्छा जिसमे दोस्ती ,रिश्तो की तिलांजलि दी जा रही है | जब हम मिलजुलकर बैठते थे आपस में हंसी मजाक भी होता था और हंसी मजाक हमे तनावमुक्त करता था, हमारी शक्ति बढ़ाता था | पुराने जमाने के लोग अपना दिनभर का काम समाप्त कर शाम को एकत्रित होकर गाना –बजाना ,नृत्य संगीत ,मौज मस्ती करते थे और आनन्द लेते थे | आज किसी के पास फुर्सत ही नही है | लोग देर रात तक घर आते है ,आधीरात में खाना खाते है टीवी देखते है और सो जाते है ऐसे में कहाँ है – हंसने का समय व् हंसने की आजादी | इसी तनाव भरी जिन्दगी के कारण आ

मन और बुद्धि के बीच क्या अंतर है?

बुद्धि और मन- हर व्यक्ति चार स्तर पर जीवन जीता है। ये स्तर हैं— शरीर, बुद्धि, मन और आत्मा। व्यवहार में इनको अलग-अलग नहीं देखा जाता। सब एकरस होकर कार्य करते हैं। मन और आत्मा का भी एक ही स्तर समझ में आ पाता है। जिसको हम मन समझते हैं वह सत्वगुणी, रजोगुणी, तमोगुणी मन आत्मा नहीं है। यह मन जिसका प्रतिबिम्ब बनकर सामने आया है वह भीतर छिपे हुए मूल मन का बिम्ब-रूप है। वही आत्मा है। आनन्द-विज्ञान का वह सहचारी है, अत: व्यवहार में जीवन के तीन स्तर ही कार्यरत दिखामन बुद्धि आत्माई देते हैं। शरीर और बुद्धि का कार्यक्षेत्र बहुत सीमित है। शरीर यूं तो बुद्धि के निर्देश पर ही कार्य करता है, फिर भी मन अपनी इच्छाओं की अभिव्यक्ति शरीर के माध्यम से, इन्द्रियों के माध्यम से करता रहता है। शरीर का कार्य श्रम की श्रेणी में आता है। शरीर को यदि अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जाए तो उसका प्रभाव भी सामने वाले के शरीर तक देखा जा सकता है। बुद्धि का प्रभाव भी बुद्धि तक ही होता है। बुद्धि का कार्य तर्क पैदा करना है। व्यक्ति एक-दूसरे की बात को तर्क में डालता है, अपने तर्क को सही साबित करने के लिए हठ करता है अथवा अन्य तर्क

श्री सत्य साईं बाबा द्वारा भक्तों के दुविधा का निवारण

श्री सत्य साईं बाबा द्वारा भक्तों के दुविधा का निवारण-   प्रश्न: स्वामी, आपकी कृपा कैसे जीतें? उत्तर: सभी इच्छाओं को त्याग कर, अपने दिल को शुद्ध रखो | तब मैं बिना माँगे तुम्हारी सारी मनोकामना  पूरी करूँगा | प्रश्न: स्वामी वह क्या है जो मनुष्य को सत्यता से आवृत कर देता है | उत्तर: यह केवल मन है जैसे बादल जो सूर्य की किरणों से उत्पन्न होते हैं, सूर्य को हीं आवृत्त कर देते हैं| और जब तेज हवा चलती है, तो बादल बिखर जाते हैं | फिर हम सूर्य को देख सकते हैं। वैसे ही मन आत्मा                  को  आवृत  कर देती है जिससे वह उत्पन्न हुई है। आज मनुष्य अज्ञानता में डूब चुका है,तथा शांति और खुशी से दूर होता जा रहा है। प्रश्न: स्वामी, अपनी आध्यात्मिक शक्ति कैसे विकसित करें? उत्तर : किसी को आध्यात्मिक शक्ति की खोज करने, दुनिया भर में जाने और बहुत पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है अपने घर में रहो, अपने आप में इसे विकसित करो , आप में हीं आध्यात्मिक शक्ति निहित है| भगवान तुम्हारे बाहर नहीं है, भगवान तुम्हारे अंदर है तुम एक आदमी नहीं हो , तुम अपने भगवान खुद हो, लेकिन तीन:- जो तुम्हे लगता है कि१. तुम शरीर ह

संस्कारो का न होने दे पतन

संस्कारो का न होने दे पतन आप अपने समाज को ही क्यों , अपने घर और अपने पड़ोस को देख ले | आपको एहसास हो जायेगा की हम हकीकत के किस दौर से गुजर रहे है | हम सब मानते है की अतीत के युग अच्छे रहे होंगे , पर हमारे लिए तो आखिर वही काम आएगा जिस युग में हम स्वयं जन्मे है | अतीत की अच्छाईयों की हम तारीफ करेंगे ,उससे प्रेरणा लेंगे ,उन्हें अपने जीवन में जीने की कोशिश करेंगे ,पर हम आदर्श के चक्कर में यथार्थ को दरकिनार तो नहीं कर सकते | हमारी सरकारे भी हमारे देश के सांस्कृतिक पतन का कारण रही है किसी समय किसी भी फिल्म में कोई एक सामान्य सा सेक्सी द्र्श्य दिखाया जाता तो उस पर सेंशर बोर्ड बैठा दिए जाते थे | सामाजिक संस्थायें ऐसे दृश्यों पर क़ानूनी करवाई करने को आगे बढ़ जाती थी | पता नहीं , अब वे बोर्ड और संस्थाए कहाँ चली गई है ? अब तो शायद ही ऐसी कोई फिल्म होती हो जिसमे सेक्स न हो ,शराब न हो ,अपराध या आतंक न हो | आखिर हर फिल्म के पीछे ये सब बाते ताने बाने की तरह क्यों गुथी हुई रहती है ? आज का युग टी.वी. और कंप्यूटर का युग है | इसीलिए जैसा सिनेमा इन्टरनेट पर दिखाया जायेगा ,युग वैसा ही निर्मित होगा | आज जितना

मिट्टी में छिपा स्वास्थ्य का राज

मिट्टी तो सबका आधार है ,सबके गुरुत्वाकर्षण और सबके स्वास्थ्य का राज है | महात्मा गाँधी तो मात्र मिट्टी से अपनी प्राकृतिक चिकित्सा कर लेते थे | सबसे बड़ी बात है मिट्टी में रहने वाला गुरुत्वाकर्षण हमे एक दुसरे की ओर खींचता है | क्या आपने कभी सोचा की एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति की ओर आकर्षित होता है , क्यों ? क्योंकि उनमे दोनों देहो की मिट्टी का गुरुत्वाकर्षण काम करता है | स्त्री पुरुष एक दुसरे की ओर आकर्षित होते है क्योंकि मिट्टी की घनात्मक और ऋणात्मक ऊर्जा परस्पर संघटित होती है | यह पृथ्वी तत्व का चुम्बकीय गुरुत्वाकर्षण है | आप अपने को पृथ्वी तत्व से जोडकर रखे | इसके लिए प्रतिदिन १५ मिनट नंगे पांव घुमने जाइए | लोग घुमने तो जाते है पर जूते पहनकर | इससे हवाखोरी तो हो जाती है ,पर पृथ्वी तत्व का संस्पर्श नहीं हो पाता | किसी पब्लिक पार्क में घास पर नंगे पांव १५ मिनट तक चलिए | आप यह न समझे की मैं घास पर चल कर किसी को हिंसा के साथ जोड़ रहा हूँ | हरी घास पर चलना पृथ्वी और वनस्पति के पास होने का सबसे सुगम रास्ता है सूर्योदय से पहले हरी घास पर जो ओस की बुँदे जमा होती है उन्हें इक्ठटा कीजिए | और अपनी

मोहब्बत अगर किसी से हो जाए Heart Touching Hindi Ghazal

          मोहब्बत मोहब्बत अगर किसी से हो जाए तो खता न कीजिए ! प्यार - भरी बाते ये जालिम दुनिया क्या जाने ! तुम अपने महबूब से इजहार करने में समय न गंवाह दीजिये ! मोहब्बत अगर किसी से हो जाए तो खता न कीजिए ! मिलने देना तुम रूह को रूह से आखिरी साँस तक महबूबा से ऐसी मोहब्बत कीजिय !  मोहब्बत अगर किसी से हो जाए तो खता न कीजिए ! हर शख्स तुम्हे देखेगा बुरी नजर से तुम अपनी निगाहे महबूब से मिला लीजिए ! जन्म –जन्म का मिलन रहा जो अधुरा अब दो रूहे को एक हो जाने दीजिए ! मोहब्बत अगर किसी से हो जाए तो खता न कीजिए !  

नैतिक मूल्यों का पतन - नैतिक शिक्षा पर निबंध

नैतिक शिक्षा पर निबंध- वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नैतिकता व् अनुशासन को कोई स्थान नही दिया गया | इनके बिना शिक्षा अधूरी है और समाज व् राष्ट्र के लिए अभिशाप सिद्ध हो रही है | यही कारण है की जब छात्रों की कोई मांग पुरी नहीं होती ,तो वे विघटनकारी प्रवृतियों में लिप्त हो ,विद्रोह करते है और सरकारी व् निजी वाहनों पर हल्ला बोल देते है , परिणाम सब जानते है | अत: सभी शिक्षण संस्थाओं ,अभिवावकों व् समाज सेवी संस्थाओं को इस विषय पर गहराई से विचार करना चाहिए , ताकि राष्ट्र के भावी कर्णधारो को योग्य ,आदर्श व् उतरदायित्व पूर्ण नागरिक बनाया जा सके | वर्तमान स्कुलो में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं | ऐसा लगता है की भारतीय शब्दकोश से “ नैतिकता ” शब्द लोप हो गया है | घरो में माता –पिता एवं बच्चो की इक्कठे मिल बैठने का समय नहीं मिल पाता है की वे किसी विषय पर बात कर सके | बच्चे जो कुछ बाहर देखते है , सुनते है या मीडिया में देखते है अथवा पत्र पत्रिकाओ में पढ़ते है ,उन्हें सत्य समझकर उनका अनुकरण करते है | कई बच्चे तो उनकी नकल करने में अथवा इन दृश्यों को स्वयं करने में ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके है | आज ए

सपने है संजोने

इच्छाएँ व्यक्ति को  जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है , जो इच्छाए पालता है और फिर उनकी पूर्ति के लिए सतत प्रयास भी करता है  वही जीवन में आगे बढ़ जाता है | जिसकी कोई इच्छा ही नहीं उसका जीवन समाप्त हो गया समझना चाहिए , क्योंकि कोई इच्छा ही नहीं रखने वाला का जीवन स्थिर हो जाता है और वह केवल अपने हिस्से की सांसो को लेकर छोड़ने और फिर चुपचाप इस दुनिया से विदा हो जाने जैसा है |  कुछ लोग इच्छाएँ तो करते है ,लेकिन उनकी पूर्ति में जो संघर्ष करना पड़ता है ,उनसे घबराकर वे अपनी इच्छाओ का गला घोंट देते है और संतोष मिलने का नाटक करते है हालांकि संतोष नाम का गुण उनमे नहीं होता , वे केवल दिखावा करते है भीतर से अशांत बने रहते है और अपने भाग्य को कोसते  रहते है  | अपनी इच्छा को लेकर वे कभी संघर्ष नहीं करते , मन से प्रयास नहीं करते और जीवन भर दुखी रहते है | यदि आप सुख -समृधि ,शांति ,और सफलता पाना चाहते है तो मन में कुछ कर  गुजरने ,कुछ अनोखा हासिल करने की इच्छा अपने मन में जागृत कीजिये | हमेशा नई - नई  अभिलाषाए पैदा कीजिए |  यह सोचकर एक ही परीस्थिति में रहकर रोते न रहिए की ईश्वर ने आपके भाग्य में इत

सहनशीलता की परीक्षा - लघु प्रेरणात्मक कहानी

सहनशीलता की परीक्षा यूनान के महान दार्शनिक थे सुकरात | उनकी पत्नी बेहद झगड़ालू थी वह छोटी –छोटी बातो पर हमेशा सुकरात से लड़ती थी लेकिन वे हर समय शांत रहते | एक दिन सुकरात अपने कुछ शिष्यों के साथ घर आए तो पत्नी ने किसी बात पर नाराज हो गई | सुकरात ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया | लेकिन वह ऊँची आवाज में उन्हें भला बुरा कहने लगी | इतना कुछ होने पर भी वे कुछ ना बोले तो उनकी पत्नी ने बाहर से कीचड़ उठाकर उनके मुँह पर डाल दिया | सुकरात जोर से हंसने लगा और कहा , तुमने आज पुरानी कहावत झुटला दी|  कहा जाता है की ‘ जो गरजते है वो बरसते नहीं लेकिन तुम गरजती भी हो और बरसती भी हो ‘ सभी शिष्यों ने यह घटनाक्रम देखा उनमे से एक शिष्य ने सुकरात से पूछा ,’ आप अपनी पत्नी का ऐसा रुखा व्यवहार कैसे सह लेते है ‘|  सुकरात बोले , मेरी पत्नी सर्वश्रेष्ट है | वह मेरा अपनान कर यह देखना चाहती है की मैं कच्चा हूँ या पक्का | मेरे अन्दर सहनशीलता है या नहीं ? ऐसा करके वह मेरा भला कर रही है “ | पत्नी ने जब यह शब्द सुने तो वह अंतर्मन से बहुत ही शर्मिंदा हुई | उसने कहा ,” मुझे क्षमा करे | आप देवता है मैंने यह जानने में भूल की “| 

अंतरजातीय विवाह क्यों नहीं ? विवाह पर पुनर्विचार

   अंतरजातीय विवाह पर - एक भावुक अपील मैं जिस बात का जिक्र कर हूँ , मानवीय दृतिकोण से बहुत ही आवश्यक है , अगर आपको लगे की यह हमारा जाति मामला है तो मुझे क्षमा करे | मेरा विषय है अंतरजातीय विवाह ,कोई इन्सान अगर अपनी पसंद से शादी कर ले तो कौनसा उसने गुनाह किया , जो समाज के लिए बड़ा अपराध बन जाता है | प्राचीन समय से लेकर आधुनिक काल तक दृष्टान्तो से इतिहास भरा पड़ा हुआ है उदाहरण – अकबर ने जोधाबाई से शादी की लेकिन इतिहास गवाह है की जोधा के पिता भारमल का मुगलों के साथ अच्छे संबध थे | जिस दुष्यंत से प्रेम विवाह किया था वो भी एक ब्राहमण की पुत्री शाकुन्तला के साथ और राजा दुष्यंत थे एक क्षत्रिय और उसका एक पुत्र था भरत जिसके नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा ,यह सब तो उच्चकोटि वर्ग के विवाह के उदाहरण है मगर यह सब अंतरजातीय विवाह है | मेरा सवाल यह है की अगर आपकी बहिन ने किसी दूसरी जाति के लडके के साथ विवाह करती है तो आपका समाज इसे गुनाह क्यों मानती है , मानवता की दृष्टी से यह कोई गुनाह नहीं है , जो समाज इसे गुनाह मानता है ,वो  सबसे ज्यादा मुर्ख और समसे ज्यादा दलाल का समुह है| आप जिस समाज की आड़ में

श्री सत्य साईं बाबा के भगवान होने का सच

युगों से ये घटित होता आया है कि जब-जब वो सर्वशक्तिमान सत्ता इस धरा पर अवतरित हुआ है हम मानवों को अपने मूल स्वरूप से अवगत करवाने के लिए, हम अपनी सीमित ज्ञान से उस असीमित प्रेम और दया के सागर को पहचानने में असफल रहें हैं| अतः हमारी सीमित ज्ञान के अनुसार हीं तुक्ष्य चमत्कारों के माध्यम से उस सर्वशक्तिमान सत्ता को अपना परिचय देने के लिए विवश होना पड़ा है| कलयुग के अवतार श्री सत्य साईं बाबा के जहाँ विश्व भर में उन्हें भगवान मानने वाले करोड़ों अनुयायी हैं वहीं करोड़ों आलोचक भी हैं, जो उनके चमत्कारों की आलोचना करने में पीछे नहीं रहते| इस संदेह का निवारण करने के लिए श्री सत्य साईं बाबा ने अपना परिचय स्वयं देते हुए स्पष्ट रूप से कहा है यद्पि मेरे द्वारा किए गए  चमत्कार मेरे सर्वशक्तिमान सत्ता के समक्ष अति तुक्ष्य हैं फिर भी समस्त प्राणियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मैं चमत्कार करता हूँ ताकि वे अपने स्वरूप से अवगत हो सकें | बाबा ने कहा कि मेरी शक्तियाँ असीम, अनंत और अकल्पनीय है| उन्होंने बताया कि अब तक के अवतारों में सबसे स्पष्ट भविष्यवाणी कृष्ण के अवतार होने की हुई है, उन्हें भी कई अवसरों

पढ़िए साड़ी की दास्तान - साड़ी पर कविता

 साड़ी की दास्तान - साड़ी पर कविता क्या बताऊं मैं, बहुत अच्छा लगता है जब एक साधारण कपड़े से सज धजकर बाहर निकलती हूं साड़ी बनकर।  कई जगह में बिकने जाती हूं। सोकेस पर एक बेजुबान औरत पर मैं नमूना के तौर पहना दी जाती हूं। बुरा लगता है तब जब सब लोग मुझे टूक टूक देखते है,दाम पूछते है और चले जाते है। अरे.... साड़ी को क्या मैनें बनाया है ?दाम तो दुकानदार ने दी है, बनाया तो मुझे डिजाइनर ने है रंग कारिगरों ने दी है और पल भर में प्यार करने वाले खरीददार मुझे छोड़कर चले जाते है। कई दिनों तक बेजुबान औरत के खूबसूरती का ताज बनी रही।  मेरी ऊपर जो धूल जमी रही उसके ऊपर जैसे ही दुकानदार की नज़र पड़ी बस जोर से मुझे एक कपड़े से मारकर धूल साफ़ करता रहा मैं चिल्लाई की धीरे धीरे पर मेरी आवाज़ कौन सुनता मैं भी तो इस बेजुबान औरत की तरह गूंगी थी। एक दिन एक सुंदर सी औरत आई मुझे खरीदने मुझे भी बहुत खुशी मिल रही थी कि चलो अब मैं इस दुकान की कैद और बेजुबान औरत की खूबसूरती के हिस्से से फूर होकर। मेरे असली मालकिन के साथ जाऊंगी और उसके खूबसूरती का हिस्सा बनूंगी। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा पर मेरी सांस अटक रही थी ब

हिंदी क्यों नहीं बनी राष्ट्रभाषा ??

                                                       राष्ट्रभाषा हिन्दी पर निबंध दुनिया का शायद ही कोई राष्ट्र होगा , जो अपनी भाषा को अपने ही देश में स्थापित करने के लिए यूं अनवरत कष्ट एवं विरोध झेल रहा हो | १४ सितम्बर १९४९ को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला लेकिन इतने वर्षो के बाद भी हिंदी का आलम उस पत्नी की तरह है जिसका पति अतिरिक्त प्रेयसी रखता है , उसे प्यार भी करता है लेकिन लोक दिखावे के लिए बार –बार चिल्ला चिल्लाकर कहता है की मेरी पत्नी प्रतिबध्दता मेरी पत्नी के लिए है | यही जन्नत की हकीकत है | वस्तुतः हम दुनिया के सबसे बड़े हिपोक्रेट्स है की हम बात तो हिंदी भाषा की विकास की करते है लेकिन हमारे बच्चो को सबसे पहले पब्लिक स्कुलो में भेजते है , सभा – गोष्टियो में अंग्रेजी झाड़कर स्वयं को सभ्य और महान समझते है | जाने इस अंग्रेजी में क्या नशा है की हर कोई उसे होटों पर लाना चाहता है | लोर्ड मैकाले ने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा की अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाकर , वे इस देश की पुरातन संस्कृति को सहज ही नष्ट कर देंगे | दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी – लिखी एवं बोली

ढूँढ रही मैं बावरी - हिंदी कविता

ढ़ूँढ रही मैं बावरी, अपने हिस्से का, स्वर्णिम आकाश, टिम-टिम करते तारे, हाय! सुख-दुख के, बन गए पर्याय , तम घनेरा ऐसे , छाय जैसे चन्द्र में ग्रहण लग जाए, मौसम आए मौसम जाए, कभी न सरसो फूली हाय! हरियाली की एक नज़र को, तमन्नाएँ तरसती रह जाएँ, झूम कर बारिश की आशाएँ, बादल गरजें और बूँद-बूँद, गिर कर रह जाए, एक बूँद भी अगर, मिल जाए,समझो, जीवन तृप्त हो जाए, ख्यालों के विस्तृत , दायरे में ढ़ूँढू अपना , परिचय मिल न पाए, दशकों से मैं  बावरी, ढूँढ रही अपने हिस्से, का स्वर्णिम आकाश, जब भी पाऊँ, धूमिल, हीं पाऊँ, ढूँढू और, ढूँढती हीं जाऊँ ।।

क्या आप जानते हैं हर रोज दही खाने के फायदे?

आयुर्वेद के अनुसार दही एकमात्र ऐसा कुदरती खाद्ध है , जिसमे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले बेक्टीरिया मौजूद होते है | दही में प्रचुर मात्रा में होने वाले ये बेक्टीरिया छोटी ऑत  की भीतरी सतह पर चिपक जाते है शरीर को नुकसान पहुँचाने वाले बेक्टीरिया को शरीर से बाहर धकेलने में ये बेहद कारगर है | दही में सभी गुण होते है जैसे - कैल्शियम , विटामिन डी , फास्फोरस आदि साथ ही विटामिन ए भी होता है , जो आँखों को स्वस्थ रखता है |  भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर में सभी में दही के गुणों को जाना है | अमेरिका में भी माना जाता है की की दूध की अपेक्षा दही अधिक गुणकारी है ,वे मानते है की इससे कमर पतली व् रंग साफ होता है | हमारे देश में भी पंजाबियों का स्वास्थ्य अच्छा माना जाता है और उसका राज है - दही का अधिकाधिक सेवन करना | दही के फायदे - रक्त की कमी और दुर्बलता से पीड़ित व्यक्तियो के लिए दही अमृत है  जिनके पेट में कीड़े हो , मोटापा हो , भोजन में स्वाद न आता हो या भूख कम लगती हो ,ऐसे लोगो को दही का सेवन करना चाहिए जिससे उनको इन बीमारीयों से छुटकारा मिल सके | दही को शरीर पर मलकर स्नान कर

आपके वस्त्र बतायेंगे कैसा है आपका स्वभाव

आपके वस्त्र बतायेंगे कैसा है आपका स्वभाव प्रिय पाठको - क्या आप जानते है की पहने हुए कपड़ो से आपका और दुसरे लोगो का  स्वभाव जान सकते है यदि नहीं तो आज हम आपको बतायेंगे की आप किस तरह से दुसरे लोगो के स्वभाव को जान सकते है , पहने हुए कपड़ो के माध्यम से | पारदर्शी कपडे पहनने वाला व्यक्ति का स्वभाव मनमौजी , निर्भीक और आजाद ख्यालो का होता है | कमीज या टी शर्ट को पेंट के अंदर पहनने वाला व्यक्ति ओपचारिक और सभ्य स्वभाव को दर्शाता है | कमीज या टी शर्ट को पेंट से बाहर रखने वाला हंसमुख , रौबीले स्वभाव का होता है | पुराने मैले कपड़े पहनने वाला व्यक्ति रोगी और नीरस स्वभाव वाला होता है | प्रेस किये हुए साफ वस्त्र पहनने वाला व्यक्ति ओपचारिक और चुस्त होता है बिना प्रेस किये हुए वस्त्र पहनने वाला व्यक्ति का स्वभाव आलसी और असभ्य होता है | कमीज का कोलर ऊपर रखने वाले व्यक्ति का स्वभाव लोफरपन को दर्शाता  है  | जो कमीज या टी शर्ट की बाजु मोड़कर रखते है , वे साहसी होते है और कुछ करने का जज्बा रखते है | प्लेन कपड़े पहनने वाला व्यक्ति शांत सीधे स्वभाव के होते है और उन्हें चिंतामुक्त जीवन पसंद होता है | जो लोग प्रतिद

प्रेम ही परमात्मा है -ओशो

प्रेम शब्द से न चिढ़ो। यह हो सकता है कि तुमने जो प्रेम समझा था वह प्रेम ही नहीं था। उससे ही तुम जले बैठे हो। और यह भी मैं जानता हूँ कि दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीने लगता है। तो तुम्हें प्रेम शब्द सुनकर पीड़ा उठ आती होगी, चोट लग जाती होगी। तुम्हारे घाव हरे हो जाते होंगे। फिर से तुम्हें अपनी पुरानी यादें उभर आती होंगी। लेकिन मैं उस प्रेम की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ उस प्रेम का तो तुम्हें अभी पता ही नहीं है। और मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ वह तो कभी असफल होता ही नहीं। और मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ उसमें अगर कोई जल जाए तो निखरकर कुंदन बन जाता है, शुद्ध स्वर्ण हो जाता है। मैं जिस प्रेम की बात कर रहा हूँ उसमें जलकर कोई जलता नहीं और जीवंत हो जाता है। व्यर्थ जल जाता है, सार्थक निखर आता है। लेकिन मैं तुम्हारी तकलीफ भी समझता हूँ। बहुतों की तकलीफ यही है। इसलिए तो प्रेम जैसे प्यारे शब्द, बहुमूल्य शब्द ने अपना अर्थ खो दिया है. जैसे हीरा कीचड़ में गिर गया हो। लोग कहते हैं मुहब्बत में असर होता है। कौन-से शहर में होता है, कहाँ होता है। स्वभावतः तुमने तो जिसको प

भारत में भ्रष्टाचार व इसे रोकने के उपाय

                            भ्रष्टाचार हमारा वर्तमान बहुत ही खतरनाक होता जा रहा है मनुष्य का लचीलापन उसे खतरनाक से खतरनाक जुर्म करने पर मजबूर कर रहा है | अपने लालच के कारण ही आदमी भृष्टाचारी बन रहा है | आज के समय में भ्रष्टाचार ऐसे फैल रहा है | जैसे कोई वायरस हो , कोई रिश्वत ले रहा है तो कोई रिश्वत दे रहा है तो किया इसका अर्थ यही हो सकता है की वर्तमान में हर काम रिश्वत देने और लेने पर ही पुरे होंगे | भ्रष्टाचारियो की संख्या ऐसे बढ़ रही है जैसे जंगल में लगी आग | हर रोज अखबारों व् टेलीविजन में भ्रष्टाचार के बारे में खबरे छपती रहती है की आज तो नेता रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया ,आज तो पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़ा गया | परन्तु इन खबरों से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता | रिश्वत लेने वाला ऐसे ही लेता रहेगा अगर रिश्वत लेने वालो से यह पूछा जाए की तुम रिश्वत क्यों लेते हो तो वो यही कहेगा की इसकी जिम्मेदार सरकार है क्योंकि सरकार ने हर वस्तु पर इतने टेक्स लगा रखे है जितनी हमारी महीने की तनख्वाह भी नहीं है | अगर रिश्वत नहीं लेंगे तो हमारे बीवी –बच्चे भूखे मर जायेंगे | और अगर  देने वाले से पूछे तो वह भी यही

सम्मोहन विद्या है या विज्ञान जानिए इसका रहस्य

               कला या विज्ञान सम्मोहन का जादू सम्मोहन को जादूगरों का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था यह किसी को किये गए जादुई प्रेम का भी प्रतीक है | इन बातो से लगता है की जैसे सम्मोहन कोई परलौकिक शक्ति हो मगर ऐसा नहीं है , सम्मोहन यानी हिप्नोटिज्म एक पूर्ण विज्ञान है | इसके जरिये किसी की भी मानसिक अवस्था को बदला जा सकता है या उस पर मानसिक कब्जा किया जा सकता है ऐसा करके उस व्यक्ति से मनचाहा कार्य करवाया जा सकता है | किसी को अपने वश में करने के लिए सम्मोहन की कला का सदियों से प्रयोग होता रहा है | पहले लोग इसे जादू दिखाने का जरिया मानते थे जब इसका वैज्ञानिक अध्ययन हुआ तो फिर इसे एक पूर्ण विज्ञान समझने लगे | सम्मोहन के ज्ञान और मनोविज्ञान की खोज वियना के एक डॉक्टर ए मेस्मर के द्वारा किया गई थी इसलिए इसका एक नाम मेस्मेरिज्म भी है सम्मोहन शब्द का प्रयोग सबसे पहले १८४० में स्कौट लैंड  के एक सर्जन जेम्स ब्रेड ने किया था | इस शब्द की उत्पति ग्रीक भाषा के शब्द हिप्नोस से हुई , जिसका अर्थ  – नींद में होना या अर्धचेतन अवस्था में होना | यही कारण है की जो व्यक्ति सम्मोहन की अवस्था में होता है वह उ

भावुकता मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है

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                          भावुकता मनुष्य या सभी प्राणियों का संवेदनशील प्रवाह जिसके सामने दोष भी गौण हो जाते है जब यह भाव किसी में पनपता है तो सृष्टि की सभी निर्जीव व् सजीव वस्तुओं पर प्रभाव डालता है श्रध्दा जब दीर्घकालीन होती है तो भावुकता का जन्म स्वभाविक नैसर्गिक है यह एक आत्मिक भाव है ,जो इंसानियत के रूप में स्वत ही प्रकट होती है | यह एक पहचान है उन भावो से अलग जो इन्सान को ओरो से पृथक करती है इसके अनेक रूप है | कभी –कभी नारी के वियोग के रूप में ,कभी माँ के पुत्र के वियोग में ,कभी अधूरी इच्छा के रूप में ,कभी अत्यधिक प्रसन्नता के भाव के रूप में ,जब इसका यह रूप सामने आता है तो प्राणी में क्षण भर के लिए सही उसमे आत्मिक भाव एवं उच्चकोटि की आत्मा के दर्शन होते है | इस प्रवाह की परत तब खुलती है जब यहा तो जीव में प्रसन्नता का भाव या दुःख का भाव हो | परन्तु तब भाव के खुलने का एक महारास्ता प्रसन्नता और वियोग ही नहीं ,संस्कार का भी एक महत्वपूर्ण योगदान है जब मनुष्य में संस्कार होते है ,तो उसकी अन्तकरण की परत हमेशा ही खुली रहती है तथा वह थोड़े बहुत हर्ष या वेदना से भावुक हो जाता है | ममत्व को

भीतर तो देखो -ओशो

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भीतर तो देखो भगवान कैसे मिलेगा ? आदमी से मिलना नहीं हो पा रहा है , बस इतनी सी बात है इसलिए तो बुध्द ने ईश्वर को हटा लिया और कहा – इस ईश्वर को हटा ले ने से लाभ होगा , हानि तो कुछ भी नहीं और भीतर ईश्वर को प्रतिष्ठित किया | तुम्हारा मंदिर अगर तुम्हारे भीतर हो ,तो लड़ाई –झगड़े पैदा नहीं होंगे | तुम्हारा मंदिर अगर बाहर बना , तो मज्जिद से अलग हो जाएगा| लड़ाई –झगड़े शुरू हो जायेंगे | बुध्द ने कहा – ‘ अब वक्त आ गया है की मंदिर आदमी के भीतर बने ,वक्त आ गया है की अब आदमी मंदिर बने | अब ईट पत्थर के मंदिर से काम नहीं चलेगा , निश्चित ही मनुष्य को भगवान बनाया है ,मनुष्य को भगवान होने की संभावना दी | मनुष्य को कहा – भगवान कही और नहीं ,तेरे ही भीतर छिपा है ,उसे प्रकट होना है | ठीक भूमि है ,जल सींच ,सुरक्षा कर , सूरज की किरणों को पड़ने दे , मेघ बरसे तो छिप मत , खुला रख , अनुकूल समय पर , सम्यक ऋतू में तेरा फूल खिलेगा , तू मिटेगा ! भगवान होगा , इसीलिए तो भगवान बुध्द कहते रहे है की – भगवान नहीं , फिर भी उनको प्रेम करने वाले लोग उन्हें भगवान कहते रहे है और बुध्द ने एक भी जगह इंकार नही किया की मुझे भगवान मत कहो

बॉलीवुड अभिनेता शशि कपूर का निधन, मुंबई में ली आखिरी सांस

*शशि कपूर:* हिंदी सिनेमा के अभिनेता, वैश्विक अपील के साथ शशि कपूर, जिनके कुटिल दाँत, अच्छा दिखने वाला और सुंदर आकर्षण ने महिलाओं को दिवाना कर रखा था,अमिताभ बच्चन के साथ उनकी सेल्यूलॉइड साझेदारी ने 'दिवार', 'कभी कभी', 'त्रिशूल' और कई अन्य फिल्मों में साथ काम किए जो अर्थपूर्ण वैकल्पिक सिनेमा में बेहतरीन उत्पादित थे। पृथ्वी थियेटर और भारत के पहले क्रॉसओवर सितारों के बीच सोमवार शाम 5.20 बजे मुंबई के कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। उनके भतीजे अभिनेता रणधीर कपूर ने PTI को बताया, "उनको Kidney की समस्या थी। वह कई सालों से डायलिसिस पर थे।" वह 79 साल के थे। शशि तीन कपूर बंधुओं में से सबसे कम उम्र के थे - राज और शम्मी जो अन्य थे - बॉलीवुड के परिवार के नंबर 1 के रूप में माना जाता है। अब ये तीनों चले गए हैं। एक युग खत्म हो गया है राज ने सुनहरा दिल का ट्रम्प बनाया; 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जपानी' जैसे गाने वैश्विक आन्तरिक गीत बन गए। शम्मी की प्राचीन युगल, 'याहू!' बॉलीवुड में रोमांटिक उत्साह के विचार को बदल दिया। शशि की स्क्रीन क

माँ की याद में- हर माँ को समर्पित एक सच्ची कविता।

माँ के जाने के बाद का दर्द महसूस किया है कभी? नहीं किया तो जरूर पढ़ें :- ' माँ की याद    ' में कविता - माँ व्याधियो से घिर गया हूँ अब तुम्हारी याद आती है घर की हर जगह देती है आभास कि  तुम हो यहीं कहीं आस-पास बातो का वही सिलसिला कही धुप में बैठ कर बतियाता हूँ तुम से मिला है जीवन दान अब बुढ़ापे की और बढ़ रहा हूँ तुम्हारे जैसे कष्ट भोग रहा हूँ धोती के कोने से आँख पोंछती पीठ पर हाथ फेरती बुदबुदाती सी कहती हो इस पर दया करो भगवान तभी टूटता है भ्रम का क्रम अब तुम कहा हो ? मेरे सामने ही तो हुई थी अस्त , असाध्य रोग से थी त्रस्त साथ चाय पीने का टुटा था क्रम अंतिम बोल थे उस दिन क्या अब चाय ही पिलाता रहेगा कन्धा दबाते हुए समझ रहा था तुम्हारे ह्रदय का धीमा था स्पंदन पप्पू गोद मर ले गया था बाथरूम तक निवृत होने पर विश्राम की बात कह उसी की गोद में ली थी अंतिम साँस सेवा उसी ने की थी अथक शून्य हुए सभी स्पंदन लेकर बैठ गया धरा पर दुलारा था सबका पृथक विलख पड़े परिजन स्वर्ण , तुलसीदल घट में उतर गया गंगाजल तुम्हारी चाह भी यही थी भजन के बोल भी थे हे नाथ ऐसा करना जब प्राण तन से निकले मुँह में तुलसीदल और ग

सुबह एक कॉफ़ी बदल सकती है आपकी सहत - कॉफी के फ़ायदे

                        कॉफी के फ़ायदे  (Coffee Benefits in Hindi) भले ही कॉफी के स्वास्थ्य संबधी गुणों को लेकर विवाद हो , लेकिन अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत है की अगर इसका सीमित और संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए तो यह फायदेमंद है | जर्नल ऑफ़ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के शोध के अनुसार रोज कप कॉफी पीने से पार्किसन का खतरा पच्चीस फीसदी कम हो जाता है | इस शोध में ३५०० महिला –पुरुषो को शामिल किया गया था हावर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है की रोजाना ४ कप कॉफी पीने से पित की पथरी होने का खतरा कम होता है | रोजाना बिना शक्कर वाली ,चार कप कॉफी पीने से मधुमेह से बचाव होता है रेडियो लोजिकल सोसाइटी ऑफ़ नार्थ अमेरिका के एक शोध के अनुसार दो कप कॉफी रोजाना पीने वालो की स्मरण शक्ति तेज होती है और ऐसे लोग जल्दी फैसला लेने में भी समर्थ होते है |

इस Actor ने खरीदा Mallya का Kingfisher Villa, 73.1 Crore दी कीमत

*विजय माल्या की Famed ''किंगफिशर विला'' एक अभिनेता को 73 करोड़ रुपये में बेचा* संपत्ति के बिक्री में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि और विजय माल्या का बकाया राशि सहित वसूली का हिस्सा भी इस रकम में शामिल है। *भारतीय स्टेट बैंक* की अगुवाई वाली बैंक के एक समूह ने बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्म *अभिनेता सचिन्नी जोशी* को फरार हुए शराब व्यापारी * विजय माल्या* को गोवा में एक शानदार समुद्र तट के सामने वाले विला को शनिवार को बेच दिया। संपत्ति, किंगफिशर विला के रूप में जाना जाता है, सुरम्य कैंडोलीम समुद्र तट पर स्थित है, एक पर्यटक आकर्षण केंद्र यह पहले एसबीआई कैप्स द्वारा तीन नीलामी के प्रयासों पर खरीदारों को आकर्षित करने में विफल रहा था - जिसने विला के कब्जे पर कब्जा कर लिया था - जाहिरा तौर पर आरक्षित मूल्य 81-85 करोड़ रूपये के बीच था। वर्तमान बिक्री के लिए, आरक्षित मूल्य 73 करोड़ रुपये पर तय किया गया था और विला ने मुंबई स्थित वाइकिंग वेंचर्स प्राइवेट के अभिनेता-कम-कारोबारी व्यापारी, 33 वर्षीय जोशी में एक खरीदार पाया। लिमिटेड ने कहा, एक एसबीआई अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध

क्या आत्मा अजर अमर है? आत्मा का रहस्य - रजनीश ओशो

        क्या आत्मा है?   क्या आत्मा अमर है? एक बार यह अनुभव हो जाए कि मैं अलग और यह शरीर अलग, तो मौत खतम हो गई। मृत्यु नहीं है फिर। और फिर तो शरीर के बाहर आकर खड़े होकर देखा जा सकता है। यह कोई फिलासफिक विचार नहीं है, यह कोई दार्शनिक तात्विक चिंतन नहीं है कि मृत्यु क्या है, जीवन क्या है। जो लोग इस पर विचार करते हैं, वे दो कौड़ी का भी फल कभी नहीं निकाल पाते। यह तो है एक्सिस्टेंशियल एप्रोच, यह तो है अस्तित्ववादी खोज। जाना जा सकता है कि मैं जीवन हूँ, जाना जा सकता है कि मृत्यु मेरी नहीं है। इसे जीया जा सकता है, इसके भीतर प्रविष्ट हुआ जा सकता है। लेकिन जो लोग केवल सोचते हैं कि हम विचार करेंगे कि मृत्यु क्या है , जीवन क्या है, वे लाख विचार करें, जन्म—जन्म विचार करें, उन्हें कुछ भी पता नहीं चल सकता है। क्योंकि हम विचार करके करेंगे क्या? केवल उसके संबंध में विचार किया जा सकता है जिसे हम जानते हों। जो नोन (known) है, जो ज्ञात है, उसके बाबत विचार हो सकता है। जो अननोन (unknown) है, जो अज्ञात है, उसके बाबत कोई विचार नहीं हो सकता। आप वही सोच सकते हैं, जो आप जानते हैं। कभी आपने खयाल किया कि आप उसे नहीं