माँ का श्रेय- प्रेरणादायक प्रसंग

    माँ का श्रेय-  प्रेरणादायक प्रसंग


             Most Inspirational Short Hindi Story


नाजी सेना का एक नौजवान सैनिक हिटलर की फौज में काम  कर रहा था | साम्राज्य -विस्तार की लालसा ने हिटलर को आक्रांता बना दिया | उसकी सेना होलैंड ,पोलैंड से चली और रूस ,जापान तक पहुँच गई | सैनिको ने गाँवो और शहरों में लूट मचा दी | उस नौजवान सैनिक को भी लूटपाट के दौरान बहुमूल्य आभूषण प्राप्त हुए |

उसने उन आभूषणों से एक डिब्बा भरकर अपनी माँ के पास भेजा | उसे यह विश्वास था की इतने कीमती जेवर पाकर माँ खुश हो जायेगी ,पर उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा , जब वह डिब्बा पुन: उसी के पास पहुँच गया | उसने डिब्बा खोला तो आभूषणों के ऊपर उसकी माँ के हाथ से लिखी हुई एक चिटी थी | उसने उत्सुकता के साथ पढना शुरू किया | उसमे लिखा था |

प्रिय पुत्र ! तेरे मन में मेरे प्रति श्रध्दा और आदर की भावना है ,तू मुझे सुख देना चाहता है | न जाने कितनी माताओ और बहनों की आहें इस डिब्बे में बन्द है  मैं चोरी का धन स्वीकार कर ,स्वयं को पतन के गढ़े में गिराना नहीं चाहती , मैं चोर की माँ कहलाना नहीं चाहती  ,मैंने अपने बेटे को देश की सेवा के लिए समर्पित  किया है ,चोर -डाकू बनने के लिए नहीं  | एक देश भक्त पुत्र की माँ बनने से मुझे जिस गौरव का अनुभव होगा ,वह धन को स्वीकारने से कभी नही हो सकेगा |

माँ की इन बातो ने उस नौजवान सैनिक की आँखे खोल दी उस दिन से उसने सब बुराइयों को परित्याग कर दिया और एक आदर्श सैनिक का उदाहरण प्रस्तुत किया | इस आदर्श जीवन के कारण वह देश के विशिष्ट व्यक्तियों की पंक्ति में खड़ा हो गया | एक बार किसी बहुत बड़े समारोह में वह अपने आदर्शो के कारण सम्मानित , और पुरस्कृत हुआ |

सम्मान के उतर में बोलते समय उसने कहा - " मैं आज जो कुछ भी बना  हूँ , उसमे मेरा कुछ नहीं है , यह सारा श्रेय मेरी माँ को जाता है |

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