सकारात्मक विचारों की शक्ति

विचारों में भी बहुत शक्ति होती है , हालांकि कुछ लोग इस तथ्य से परिचित न होने के कारण बिना सोचे समझे कुछ भी सोचते विचारते रहते है | जिसका हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है | विचार एक प्रकार का आंतरिक संवाद है ,जिसे हम अपने आप से करते है | विचार करते समय हम जिन भावो का चयन करते है ,उनका हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि व्यक्ति जैसा सोचता है ,वैसा ही बन जाता है |

जिस तरह से धनुष से तीर छोड़ा जाता है , उसी तरह मुख से निकले शब्दों के तीर भी वैसा ही प्रभाव डालते है | अशुभ भावनाओं से कहे गए शब्द अशुभ प्रभाव डालते है और ठीक वैसे ही शुभ भावनाओ से कहे गए शब्द मनुष्य के जीवन को भी बदल कर रख देते है |

हमारा जीवन चुनौतियो और संघर्षो से भरा हुआ है और अक्सर इन परीस्थितियो में हम निराशा व् हार का सामना करना पड़ जाता है जिससे हम भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते है | मनोवैज्ञानिक कहते है की हमारा चेतन मन एक समय में एक ही तरह के विचारो को पकड़ता है , ये विचार सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते है और जिस तरह के विचार मन में लंबे समय तक बने रहते है ,वैसे ही हम बन जाते है इसलिए मनोवैज्ञानिक निराशा के क्षणों में स्वयं से सकारात्मक संवाद करने पर जोर देते है क्योंकि सकारात्मक संवाद के समय उपजे सकारात्मक शब्द मन में निराशा के कारण उपजे अँधेरे को दूर करके नये आशाओं के द्वार खोलते है |

सकारात्मक सोच ,सकारात्मक संवाद ,सकारात्मक कार्य आदि बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है कुछ लोग सकारात्मकता के वास्तविक अर्थ को नहीं समझ पाते ,जिसके कारण इसका लाभ नहीं उठा पाते ,कुछ आलसी लोग सकारात्मकता को अकर्मण्यता का पर्याय समझते है और यह सोचकर ही संतुष्ट हो जाते है की जो हो रहा है ,वह अच्छा हो रहा है , वे न तो परिस्थिति को स्वीकारते है और न ही उससे निकलने का प्रयास करते है जबकि सकारात्मकता का वास्तविक अर्थ प्रतिकूलताओ में भी आशा की किरण की खोज लेना है , जिसके सहारे वह उन जटिल परिस्थिति से बाहर आ सके | किसी जटिल से जटिल समस्या से न घबराकर उसे व्यावहारिक स्तर पर समाधान कर देने का नाम ही सकारात्मकता है |

कुछ ऐसे तरीके है ,जिनके माध्यम से हम स्वयं से सकारात्मक संवाद कर अपने जीवन को उन्नत बना सकते है |


पहला तरीका – हम अपने आप से यह कहे की हम जैसे भी है ,अपने आप को कभी भी हारने नहीं देंगे और किसी भी घटना पर रचनात्मक तरीके से अपनी प्रतिकिया देंगे | इसके लिए गहरी श्वास ले ,विश्राम करे और यह सोचकर देखे की इस पूरी प्रकिया में क्या अच्छा छिपा हो सकता है और अपने आप को मानसिक रूप से तैयार कर ले | जब किसी विषय में अच्छा सोचा जाता है तो इस दिशा में प्रयास करने में कुछ न कुछ अच्छी बाते मन में आ जाती है जो हमे इस दिशा में कार्य करने के लिए मानसिक बल प्रदान करती है , लेकिन किसी विषय में गलत सोचने के लिए ज्यादा प्रयास नही करना पड़ता थोड़े ही प्रयास से किसी भी विषय के नकारात्मक पहलू उभरने लगते है ,इसका कारण यह है की हमारा माहौल नकारात्मक तत्वों से भरा हुआ है और हमने भी वैसा ही सोचने का अभ्यास कर लिया है इसलिए सकारात्मक सोचने का प्रयास ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए |

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दूसरा तरीका – हर समय हम अपने आप से सकारात्मक बाते करते हुए किसी नकारात्मक विचार को तटस्थता के साथ ग्रहण करे जैसे ऐसा कहे की ‘ मैं आज खुश हूँ ‘ , ‘मैं स्वस्थ हूँ ‘, ‘ मैं ऊर्जा से भरपूर हूँ ‘, कभी कहे की ‘ आज का दिन बहुत अच्छा है ‘ मैं अपने आप से प्रेम करता हूँ / करती हूँ , मुझे अपना काम अच्छा लगता है | ‘और ऐसा कहते या सोचते समय मन में जो भी नकारात्मक विचार आए ,उन्हें केवल देखे ,अपनाएं नहीं ,केवल उन तत्वों से गुजार जाए | जिस तरह हमारे रास्ते में फूल ,पत्थर ,काँटे सभी पड़े रहते ,उनसे बचकर ,संभालकर निकल जाते है ,उसी प्रकार हमे नकारात्मक तत्वों से बचकर निकल जाना चाहिए और फूलो के सदृश सकरात्मक विचारो व् शब्दों को अपनाना चाहिए क्योंकि जिन्हें भी हम अपनाते या स्वीकार करते है , वे हमारे अवचेतन मन में गेहराई से उतरकर हमारे व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन जाते है |

तीसरा तरीका – हम अपने सपनों व् लक्ष्य पर लगातार सोचते रहे क्योंकि ऐसा करने से हमे अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पर्याप्त खाद – पानी व् पोषण मिलता है जब हम किसी चीज के बारे में गहराई से सोचते है तो उससे सम्बन्धित नए विचार व् नए तरीके उभरकर आते है और हमारे स्वप्न और लक्ष्य को एक सुनिचित आकार मिलता है और हम सही दिशा में आगे बढ़ते है | इसके अतिरिक्त और भी कई तरीके है जिनके माध्यम से हम अपने आप से सकारात्मक रूप से जुड़ सकते है और अपने जीवन को संवार सकते है बस ,सिर्फ हमे उन तरीको के बारे में सोचकर उन्हें अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा ,तभी हमारे जीवन में सार्थक परिवर्तन संभव हो सकेगा |

Comments

  1. […] सकारात्मक दृष्टीकोण  रखने का एक और उपाय यह भी है की जिन कार्यो को अतीत में नहीं किया जा सका ,उन्हें हम वर्तमान में करने का प्रयास करे और इस तरह प्राप्त उपलब्धियो से हमारे आत्मविश्वास में बढोतरी होगी | […]

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  2. […] में सर्वश्रेष्ठ  माना गया है | विचारो , सपनो और इच्छाओ ने ही विकास को गति दी […]

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