GoTask App Review in Hindi (Daily Earn 2500 Rs. )

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  GoTask App Review in Hindi :-   आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे ऐप के बारे में जिसमें आपको ₹1 का इन्वेस्टमेंट नहीं करना है और उस ऐप से Daily ₹24 मिलेंगे, मतलब अगर हम ₹24 को 30 से मल्टिप्लाई (24Rs*30Days = 720) करें तो हमारे टोटल ₹720 होंगे, मुझे लगता है कि ₹720 आपके मोबाइल के डाटा के लिए काफी है, उस App का नाम है    GoTask Ap p , इस App के बहुत सारे VIP Plan है जिनको अगर आप choose कर लेते हैं तो आप 24 रुपए के जगह Daily ₹2500 तक कमा सकते हैं तो चलिए जानते हैं  कैसे काम करता है उसके क्या प्लान है. GoTask App क्या है? GoTask App एक daily task कम्पलीट करने वाली app है जिसमे आपको डेली 12 टास्क कम्पलीट करना होता है और उसका स्क्रीनशॉट सेंड करना होता और उसके बदले में app आपको कुछ रुपये देता है। Joining Link:-   Join Now   इस लिंक पर आप को क्लिक करना है जैसे ही आप इस लिंक पर क्लिक करते हो तो क्लिक करने के बाद एक पेज ओपन हो जाता है जैसे आप देख रहे हो ठीक है. यह आपको रजिस्टर पर क्लिक करना हो और उसके बाद सबसे ऊपर आपका मोबाइल नंबर डालना होता है, यहां पर सेकंड में आपका पासवर्ड डालना होता है और यहां

व्यक्तित्व विकास स्वामी विवेकानन्द के विचारो पर आधारित

जीवन का लक्ष्य सुख नहीं वरन ज्ञान है ! मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य सुख नहीं वरन ज्ञान है सुख और आनन्द दोनों ही विनाशी है अत: सुख को चरम लक्ष्य मान लेना भूल है | संसार से सभी दु:खो का मूल यही है की मनुष्य मूर्खता वश सुख प्राप्ति को ही अपना लक्ष्य मान लेता है मनुष्य का परम ज्ञान आध्यात्मिक ज्ञान ही माना जाता है इस आध्यात्मिक ज्ञान से ही परमानंद की प्राप्ति होती है |

सर्वप्रथम स्वयं को बदलो – जिस मनुष्य ने स्वयं पर नियंत्रण कर लिया है , उस पर संसार की कोई भी भौतिक जटिलता प्रभाव नहीं डाल सकती है , उसके लिए किसी भी प्रकार की दासता शेष नहीं रह जाती | उसका मन स्वतंत्र हो जाता है और केवल ऐसा ही व्यक्ति संसार में रहने योग्य है | निराशावादी कहते है की “ संसार कैसा भयानक है , कैसा दुष्ट है ” आशावादी कहते है , “ अहा ! संसार कितना सुन्दर है , कितना अद्भुत है “

कर्म कैसे करे – यदि कोई मनुष्य नि: स्वार्थ भाव से कार्य करे , तो क्या उसे कोई फल प्राप्ति नहीं होती ? असल में तभी तो उसे सर्वोच्च फल की प्राप्ति होती है अत : नि:स्वार्थता अधिक फलदायी होती है ,केवल अभ्यास करने का धेर्य नहीं होता |

हम लोग जितने अधिक शांत होते है , उतना ही हमारा आत्म –कल्याण होता है और हम काम भी अधिक एकाग्रता से कर पाते है जो व्यक्ति शीघ्र ही क्रोध , घृणा या किसी अन्य आवेग से अभिभूत हो जाता है , वह कोई काम नहीं कर पाता | केवल शांत , क्षमाशील व्यक्ति ही सबसे अधिक काम कर पाता  है |

जो व्यक्ति इसी चिंता में पड़ा रहता है की भविष्य में क्या होगा ,उससे कोई कार्य नहीं हो सकता | जीवन की अवधि इतनी अल्प है , यदि इसमें भी तुम किसी कार्य के लाभ – हानि का विचार करते रहो , तो क्या उस कार्य का होना संभव है ? हमे चाहिए की हम काम करते रहे , हमारा जो भी कर्तव्य हो उसे करते रहे , तभी निश्चित रूप से हमे प्रकाश की उपलब्धि होगी |

दुर्बलता ही मृत्यु है – दुर्बलता से सब प्रकार के शारीरिक और मानसिक दू:ख आते है दुर्बलता ही मृत्यु है लाखो करोड़ो कीटाणु हमारे आस –पास है , परन्तु जबतक हम दुर्बल नहीं होते ,तबतक वे हमे कोई हानि नहीं पंहुचा सकते जबतक हमारा मन कमजोर नहीं होता ,तबतक उनकी हिम्मत नहीं की वे हमारे पास भटके , उनमे त्ताक्त नहीं  कि वे हम पर हमला करे | जो कुछ भयानक है , उसका सामना करना होगा |

साहसी बनो – जब भी अँधेरे का आक्रमण हो , अपनी आत्मा पर बल दो और जो कुछ प्रतिकूल है ,नष्ट हो जाएगा | मुसीबते चाहे कितनी पर्वत जैसी हो , सब कुछ भयावह और अन्धकार भले ही दिखे , पर जान लो ,यह सब माया और  छल है डरो मत ये भाग जायेगी | चिंता ना करो , आगे बढ़ो और अपना अस्तित्व पर बल दो ! प्रकाश जरुर ही आएगा ,स्वयं अपना उध्दार करो : उठो ! जागो ! और तबतक न रुको ,जबतक लक्ष्य प्राप्ति न हो जाए ! 

लोग तुम्हारी निंदा करे या स्तुति , लक्ष्मी तुम पर कृपालु हो या ना , तुम्हारी मृत्यु आज हो या अगले युग में , परन्तु न्याय पथ से कभी विचलित न होना | कितने ही तूफान पार करने पर मनुष्य शांति के राज्य में पहुँचता है !

एकाग्रता की शक्ति – शिक्षा का मूल उधेश्य तथ्यों का संकलन नहीं अपितु मन की एकाग्रता प्राप्त करना है | संसार का समस्त ज्ञान मन की एकाग्रता से ही प्राप्त होता है मानव मन की शक्ति असीम है वह जितना ही एकाग्र होता है , उतनी ही उसकी शक्ति एक लक्ष्य पर केंदित होती है | मन को प्रशिक्षित करने का शुभारम्भ श्वास – क्रिया से होता है  नियमित श्वास – प्रश्वास का अभ्यास शरीर की दशा को संतुलित करता है मन को वश में किये बिना हम किसी भी निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते है | मन में अनासक्ति का भाव आ जाने पर कुछ भी अच्छाई व् बुराई नहीं रह जाती अनासक्त मन न केवल हमे ईश्वरीय आनदं प्रदान करता है अपितु हमारे व्यक्तित्व को ज्योतिमय बना देता है |

हम दु:खी क्यों है ?  सुख और दुःख की अनुभूति केवल मात्र अनुभूति है वास्तविकता नहीं ! हमारी सोच यदि सही है तो हम सभी प्रकार के सांसारिक दु:खो  से अछूते रह सकते है हम जब तक जीवित रहते है ,तबतक सुख की कामना करते रहते है , अंततः हमे सुख नहीं मिलता कारण स्पस्ट है की हम सुख की परिभाषा से अनभिज्ञ रहकर अमूल्य मानव जीवन की इति कर देते है इस घोर अज्ञान से हम सभी पीड़ित है |

सुख और दुःख , दोनों ही  स्थिर नहीं रहते , दोनों ही एकदूसरे पर हावी रहकर हमे विचलित करते रहते है अत : हम इन दोनों का ही परित्याग कर एक ऐसी अवस्था को प्राप्त कर सकते है जहाँ न सुख न दुःख की अनुभूति शेष रह जाती है साधना और अभ्यास द्वारा हम सुख और दुःख से भी ऊपर उठकर परमानन्द की प्राप्ति कर सकते है |

सुख दुःख का त्याग करते हुए दोनों से ऊपर उठने का सहज उपाय है की हम अपने को शरीर नहीं माने अपितु निरंतर चिंतन करे की मैं एक आत्मा हूँ , शरीर नहीं ! शरीर नश्वर है परन्तु आत्मा अमर है , अविनाशी है ! अत: शरीर का कोई मूल्य नहीं है मैं शरीर हूँ , का भाव ही हमे शारीरिक व्याधियो से जकड़ कर हमारे मन को विचलित करता है | मैं आत्मा हूँ , का भाव हमे न केवल अमरत्व का बोध कराता है अपितु हमे सभी प्रकार की सांसारिक पीडाओ से मुक्ति दिलाता है | परमात्मा से निकटता पाने के लिए दृढ़तापूर्वक कहना होगा की मैं आत्मा हूँ .. ना की शरीर |

दुःख की अनुभूति ही दुःख का कारण है ! सुख की अनुभूति ही सुख का कारण है |

Comments

  1. […] हमारे व्यक्तित्व की ऐसी विभूति है जो आश्चर्यजनक ढंग से […]

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