समय बड़ा बलवान है Short Essay on the Value of Time

 

कभी बसंत में फूल खिल जाते है , कभी पतझड़ में फूल खिल जाते है

सब समय की बात है , कुछ लाशो को कफ़न तक नहीं मिलता ,पर कुछ लाशो पर ताज महल खड़े हो जाते है |

 

समय रहस्यमय है यह कंगाल को भू पाल और भू पाल को कंगाल बनाता है समय राजमहल में रहने वाले को सड़क प्र उतार देता है और कभी सड़क पर चलने वाले को राजमहल में बिठा देता है | यह व्यक्ति को सता दिलातावाता है और कभी व्यक्ति को सता के नीचे दफ़न करवा देता है |

यह समय है जो हमारे ऊपर नीचे ,दाहें –बाहें  चारो और है | भीतर और बाहर भी है | समय की चर्चा स्वयं की चर्चा है | समय को सम्भालना वास्तव में स्वयं को सम्भालना है | समय को उपयोग स्वयं का उपयोग है | समय का मूल्य स्वयं का मूल्य है |

 

जिसने समय की कीमत और महत्व को जाना है वही तो समय पर चल पाएगा | जो समय का सही उपयोग करते है वे सफलताओ को उपलब्ध करते है | समय धन है , दुनिया का सबसे कीमती धन | पर क्या हम समय का उतना सम्मान करते है जितना की पैसे का | समय के प्रति अपने नजरिये को व्यावारिक बनाइये | अमीर गरीब ,जवान बूढ़े सभी को बराबर समय मिला है|

जिसने समय का उपयोग नहीं किया वह  स्वयं का उपयोग नहीं कर सकता | समय उसका है , जो समय का उपयोग करते है | समय हमारे साथ है हम समय में और समय हम में है |

रूठे हुए आराध्य और गुरु को मनाया जा सकता है , लेकिन बीते हुए समय को कभी भी लौटाया नहीं  जा सकता है  |

जीवन उसका नहीं होता जो जीवन जिया करते है , जीवन उसका होता है जो जीवन में समय के प्रत्येक पल को पूरा –पूरा उपयोग करता है |

समय नदी की धारा की तरह है जो पीछे से आई है और आगे बह जाने वाली है , जिसने उसका मूल्यांकन कर लिया वह जानता है की उसकी सांस समय से जुडी हुई है क्यूंकि समय ही कभी काल और कभी भाग्य बनकर आता है |

समय ही जीवन बनता है और समय ही जन्म बन जाता है | स्वर्ण और हीरे से भी अधिक कीमती है समय का हर पल |

यह तो किसी सिकंदर से पूछे की जीवन में समय का क्या मूल्य होता है ? वही सिकंदर जो मरने से पहले अपने सम्पूर्ण साम्राज्य के बदले घंटे का समय चाहता है | मौत सामने खड़ी है और विश्व विजेता असहाय है क्योकि समय से बड़ा विजेता कोई नहीं है | यह सारी दुनिया मिलकर समय गंवा सकती है लेकिन कोई भी बीते हुए समय को लौटा नहीं सकता |

व्यक्ति ने अपने जीवन में धन ,परिवार ,पत्नी ,बच्चो का मूल्यांकन तो किया पर विंडबना यह है की समय का मूल्यांकन नहीं कर पाया | हम लोगो की सबसे बड़ी कमजोरी यही है की हम समय के साथ नहीं बल्कि समय के पीछे चलते है | इसलिए हम पीछे रह जाते है |

हमने पाश्चात्य लोगो से पहनावा सिखा , पाश्चात्य रीती के तौर तरीके सीखे ,उनकी खान पान की शैली से अपने अपने खान पान को बिगाड़ने की कला सीखी है | हमने पाश्चात्य संस्कृति से नहीं सिखा तो एकमात्र – समय पर  चलने की कला |

भारतीय व्यक्ति और व्यवस्थाएं  अगर कही सबसे ज्यादा ढ़ीली है तो समय के प्रति , फिर चाहे प्रशासनिक व्यवस्था हो ,सामाजिक व्यवस्था या धार्मिक |

 

 

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